मंगलवार, 21 सितंबर 2010

तेरी यादों में डूबा था हर पल ,
आज भी तेरी सोच में वक्त गुजर रहा है!
मुस्कुराहटों से भरा,जेहन में बसा है वो हसीं कल,
पर देखो मुझ पर मेरा आज हंस रहा है!
तेरा दामन दिलाया था जिन लकीरों ने मुझे,
आज उन्ही में एक टूटे सपने का अक्स उभर रहा है!
कल मोहब्बत की जिस  दहलीज पर रखा  था  कदम,
आज वही वापस लौटने का मुकाम लग रहा है!

4 टिप्‍पणियां:

Sunil Kumar ने कहा…

तेरा दामन दिलाया था जिन लकीरों ने मुझे,
आज उन्ही में एक टूटे सपने का अक्स उभर रहा है!
अतिसुन्दर भावाव्यक्ति , बधाई के पात्र है

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

कल मोहब्बत की जिस दहलीज पर रखा था कदम,
आज वही वापस लौटने का मुकाम लग रहा है!
बहुत ही सुंदर शेर..बधाई

Gurukant Krishna ने कहा…

vivek bhai dil chu liya

ujjwal ने कहा…

one of ur best composition.. allow me to copy and keep it..