main drshta hun...so srashta bhi hun main! bramha ki pukaar hun main, vishnu ka vistaar hun main...shiv ki pralay hunkar bhi hun main!!!
मंगलवार, 21 सितंबर 2010
मोहब्बत की झील पर हर शाम मिला करते थे,
हाथों में लिए हाथ तेरे संग कभी बहा करते थे
यूँ कपूर सी खुशियाँ खो गयी किस भंवर में?
जिन लबों से आज मेरे गम हँसते है, कल उनपर
तेरे अफसाने खिला करते थे!
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