तेरी यादों में डूबा था हर पल ,
आज भी तेरी सोच में वक्त गुजर रहा है!
मुस्कुराहटों से भरा,जेहन में बसा है वो हसीं कल,
पर देखो मुझ पर मेरा आज हंस रहा है!
तेरा दामन दिलाया था जिन लकीरों ने मुझे,
आज उन्ही में एक टूटे सपने का अक्स उभर रहा है!
कल मोहब्बत की जिस दहलीज पर रखा था कदम,
आज वही वापस लौटने का मुकाम लग रहा है!
4 टिप्पणियां:
तेरा दामन दिलाया था जिन लकीरों ने मुझे,
आज उन्ही में एक टूटे सपने का अक्स उभर रहा है!
अतिसुन्दर भावाव्यक्ति , बधाई के पात्र है
कल मोहब्बत की जिस दहलीज पर रखा था कदम,
आज वही वापस लौटने का मुकाम लग रहा है!
बहुत ही सुंदर शेर..बधाई
vivek bhai dil chu liya
one of ur best composition.. allow me to copy and keep it..
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