सूक्षम स्नेह
कभी क्षैतिज धरातल,तो कभी आसमान से,
निगाहें मिला कर तो देखो
कभी पथरीली राहों पर,तो कभी नराम दूब पर
कदम मिला कर तो देखो
अश्कों की भाषा में बहुत हो गयी बातें ,
लबों को अपने अब हिला कर तो देखो
इंसान में मिले हैं ये रब तुझे,
एक बार आजमा के तो देखो
कभी संग यारों के अपने', स्थान उनका भी
एक दिल में बना कर तो देखो
अफसाने कई बताएं तुमने हमें,
एक बार ये उन्हें भी बता कर तो देखो
तरसती हैं उनकी निगाहें जिस प्यार के लिए,
एक बार उन्हें वो जाता कर तो देखो
इंसान में ...........................
तुझसे जुड़े हर जर्रे को दिया है
उन्होंने शाश्वत प्रेम,
तुम क्षणभंगुर ही सही,
जरा कदम बढ़ा कर तो देखो
शिकायत है तुम्हें की ,वक्त नहीं मिलता पास ,
उलझनें हैं बढती,नहीं दिखती सुकून की एक आस
मानस की पाने को तरलता ,
जरा उनका अनुभव आजमा कर तो देखो
इंसान में ........................................
हमारे भगवान् ,मेरा मतलब माता और पिता को समर्पित !!
गुरुवार, 1 अप्रैल 2010
रविवार, 1 जून 2008
tadap
ये मेरे तड़प की तड्पन hay
kisi daire me band jindgi ka ladkpan hai
vo jo falak pe chamkata hai
वो टुकडा मेरी जिन्दगी
ki khoi us tisnagi ko arpan है
एक सपने क टूटने को क्या कहे
जब नींद ही न टूटी
उस तम की चादर का ये बड़डपन है
की मेरी जिन्दगी मी बस एक तड्पन है
उन लहरों मी दुबे उतरे जो हम
to अपने खोखलेपन का अहसास
हुआ
आशियाँ जो वह
निराधार मिला बिखरा हुआ
मेरे रुई ने पाई ऐसी गहराई
दुनियादारी की बातें इस पेड़ को samajh aaee
की है अब नींद ने भी गहरे पाई
सपनों का आना रुकेगा
तम भी जीवन से हटेगा
tb to मेरे जीवन मी आने को
ये तड़प भी तर्पेगा।
ये मेरे तड़प की तड्पन hay
kisi daire me band jindgi ka ladkpan hai
vo jo falak pe chamkata hai
वो टुकडा मेरी जिन्दगी
ki khoi us tisnagi ko arpan है
एक सपने क टूटने को क्या कहे
जब नींद ही न टूटी
उस तम की चादर का ये बड़डपन है
की मेरी जिन्दगी मी बस एक तड्पन है
उन लहरों मी दुबे उतरे जो हम
to अपने खोखलेपन का अहसास
हुआ
आशियाँ जो वह
निराधार मिला बिखरा हुआ
मेरे रुई ने पाई ऐसी गहराई
दुनियादारी की बातें इस पेड़ को samajh aaee
की है अब नींद ने भी गहरे पाई
सपनों का आना रुकेगा
तम भी जीवन से हटेगा
tb to मेरे जीवन मी आने को
ये तड़प भी तर्पेगा।
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