मंगलवार, 21 सितंबर 2010

तेरी यादों में डूबा था हर पल ,
आज भी तेरी सोच में वक्त गुजर रहा है!
मुस्कुराहटों से भरा,जेहन में बसा है वो हसीं कल,
पर देखो मुझ पर मेरा आज हंस रहा है!
तेरा दामन दिलाया था जिन लकीरों ने मुझे,
आज उन्ही में एक टूटे सपने का अक्स उभर रहा है!
कल मोहब्बत की जिस  दहलीज पर रखा  था  कदम,
आज वही वापस लौटने का मुकाम लग रहा है!
मोहब्बत की झील पर हर शाम  मिला करते थे,
हाथों में लिए हाथ तेरे संग कभी बहा करते थे
यूँ कपूर सी खुशियाँ खो गयी किस  भंवर में?
जिन लबों से आज  मेरे गम हँसते है, कल उनपर
तेरे अफसाने खिला करते थे!
जो कल मेरी हंसी न तुम हंस लेते
तो यूँ मुझमे खुद को न तुम देख लेते
बेवफाई नहीं , जीवन के  उसूलों से वफा की थी हमने
हमारी इबादत जो तुम देख लेते!
हर पल, दिल जलता है उस बीते पल को बिताने में
उस घडी  काश तुम अपनी नजरें जरा मोड़ लेते!

रविवार, 25 जुलाई 2010

जब भी उड़ा आकाश को चूमता आया था,
हाथों की लकीरों का ये पड़ाव तो तुमने ही बनाया था |
आखिर क्यों छीन लिए पंख हमारे ?
उन्मुक्त हो उड़ना तो तुम्ही ने सिखाया था !

सोमवार, 19 जुलाई 2010

इश्क की शमा दिल में हर पल जलती है,
हँसते मुस्कुराते ग़मों पर भी ये जिंदगी चलती है
और कभी अभिनीत से जीवन को वास्तविकता में जी लूँ
ये अरमान लिए कुछ तमन्नाएं मचलती हैं !

गुरुवार, 15 जुलाई 2010

खुली आँखों से देखा, मेरी जिंदगी का खोया ख्वाब हो तुम
हर धड़कन, हर दुआ में सोचा गया वो नाम हो तुम
जिंदगी के हर शब के बाद की आशा की धूप हो तुम
अश्क तो रूठ गए हमसे अब हमारे,
कुछ मुस्कुराती तमन्नाओ का जिन्दा स्वरुप हो तुम,!

शुक्रवार, 11 जून 2010

mujhme chhipa 'tu'
आज अपने अक्स में हमने तुझे देखा है
अपनी परछाई में उभरते मेरे अन्दर के 'तुम' को देखा है
हर उस नमी में जो बह गयी बन boond आँखों से
मैंने धरातल पर , अपनी आकाश से फना ,
एक सितारे को देखा है

नींद से बेखबर अपनी आँखों में
हमने तेरी angraaion को देखा है
थमी सी apni इस नब्ज में
हमने तेरी अजनबियत को देखा है
बेखबर हमसे ऐ मोहबत मेरी
teri हर खिलती हंसी में हमने
अपने कल को देखा है


तुझमे ही हमने जिंदगी
और तुझमे ही जिन्दा मृत्यु को देखा है
निश्छल सी तेरी मुस्कान में
हमने प्रकृति के छलावे को देखा है
hmaari baaton का na ho bharosa
to suno aaine की गवाही
mere अक्स में isne ''तुझे" देखा है!