जब भी उड़ा आकाश को चूमता आया था,
हाथों की लकीरों का ये पड़ाव तो तुमने ही बनाया था |
आखिर क्यों छीन लिए पंख हमारे ?
उन्मुक्त हो उड़ना तो तुम्ही ने सिखाया था !
रविवार, 25 जुलाई 2010
सोमवार, 19 जुलाई 2010
गुरुवार, 15 जुलाई 2010
शुक्रवार, 11 जून 2010
mujhme chhipa 'tu'
आज अपने अक्स में हमने तुझे देखा है
अपनी परछाई में उभरते मेरे अन्दर के 'तुम' को देखा है
हर उस नमी में जो बह गयी बन boond आँखों से
मैंने धरातल पर , अपनी आकाश से फना ,
एक सितारे को देखा है
नींद से बेखबर अपनी आँखों में
हमने तेरी angraaion को देखा है
थमी सी apni इस नब्ज में
हमने तेरी अजनबियत को देखा है
बेखबर हमसे ऐ मोहबत मेरी
teri हर खिलती हंसी में हमने
अपने कल को देखा है
तुझमे ही हमने जिंदगी
और तुझमे ही जिन्दा मृत्यु को देखा है
निश्छल सी तेरी मुस्कान में
हमने प्रकृति के छलावे को देखा है
hmaari baaton का na ho bharosa
to suno aaine की गवाही
mere अक्स में isne ''तुझे" देखा है!
आज अपने अक्स में हमने तुझे देखा है
अपनी परछाई में उभरते मेरे अन्दर के 'तुम' को देखा है
हर उस नमी में जो बह गयी बन boond आँखों से
मैंने धरातल पर , अपनी आकाश से फना ,
एक सितारे को देखा है
नींद से बेखबर अपनी आँखों में
हमने तेरी angraaion को देखा है
थमी सी apni इस नब्ज में
हमने तेरी अजनबियत को देखा है
बेखबर हमसे ऐ मोहबत मेरी
teri हर खिलती हंसी में हमने
अपने कल को देखा है
तुझमे ही हमने जिंदगी
और तुझमे ही जिन्दा मृत्यु को देखा है
निश्छल सी तेरी मुस्कान में
हमने प्रकृति के छलावे को देखा है
hmaari baaton का na ho bharosa
to suno aaine की गवाही
mere अक्स में isne ''तुझे" देखा है!
शनिवार, 29 मई 2010
सूक्षम स्नेह
कभी क्षैतिज धरातल,तो कभी आसमान से,
निगाहें मिला कर तो देखो
कभी पथरीली राहों पर,तो कभी नराम दूब पर
कदम मिला कर तो देखो
अश्कों की भाषा में बहुत हो गयी बातें ,
लबों को अपने अब हिला कर तो देखो
इंसान में मिले हैं ये रब तुझे,
एक बार आजमा के तो देखो
कभी संग यारों के अपने', स्थान उनका भी
एक दिल में बना कर तो देखो
अफसाने कई बताएं तुमने हमें,
एक बार ये उन्हें भी बता कर तो देखो
तरसती हैं उनकी निगाहें जिस प्यार के लिए,
एक बार उन्हें वो जाता कर तो देखो
इंसान में ...........................
तुझसे जुड़े हर जर्रे को दिया है
उन्होंने शाश्वत प्रेम,
तुम क्षणभंगुर ही सही,
जरा कदम बढ़ा कर तो देखो
शिकायत है तुम्हें की ,वक्त नहीं मिलता पास ,
उलझनें हैं बढती,नहीं दिखती सुकून की एक आस
मानस की पाने को तरलता ,
जरा उनका अनुभव आजमा कर तो देखो
इंसान में ........................................
हमारे भगवान् ,मेरा मतलब माता और पिता को समर्पित !!
कभी क्षैतिज धरातल,तो कभी आसमान से,
निगाहें मिला कर तो देखो
कभी पथरीली राहों पर,तो कभी नराम दूब पर
कदम मिला कर तो देखो
अश्कों की भाषा में बहुत हो गयी बातें ,
लबों को अपने अब हिला कर तो देखो
इंसान में मिले हैं ये रब तुझे,
एक बार आजमा के तो देखो
कभी संग यारों के अपने', स्थान उनका भी
एक दिल में बना कर तो देखो
अफसाने कई बताएं तुमने हमें,
एक बार ये उन्हें भी बता कर तो देखो
तरसती हैं उनकी निगाहें जिस प्यार के लिए,
एक बार उन्हें वो जाता कर तो देखो
इंसान में ...........................
तुझसे जुड़े हर जर्रे को दिया है
उन्होंने शाश्वत प्रेम,
तुम क्षणभंगुर ही सही,
जरा कदम बढ़ा कर तो देखो
शिकायत है तुम्हें की ,वक्त नहीं मिलता पास ,
उलझनें हैं बढती,नहीं दिखती सुकून की एक आस
मानस की पाने को तरलता ,
जरा उनका अनुभव आजमा कर तो देखो
इंसान में ........................................
हमारे भगवान् ,मेरा मतलब माता और पिता को समर्पित !!
शुक्रवार, 28 मई 2010
कुछ अरमान सजाये थे ख्वाबो में हमने ,
दिल में उन अधूरी तमन्नाओ की कसक आज भी है
हर पल थम सी जाती है ये नब्ज ,
हर जहर से बढ़ कर उन यादों का असर आज भी है,
यूँ तो हमने ओढा था उस दिन खुद ही कफ़न अपना,
जिंदगी की नकाब में मरती ये रूह,
तुझे सोच के जिन्दा आज भी है,
बेमकसद सी हो गयी है ये जिंदगी हमारी,
तेरी पनाहों की तलाश में जारी जिंदगी का सफ़र आज भी है
गुरुवार, 1 अप्रैल 2010
सूक्षम स्नेह
कभी क्षैतिज धरातल,तो कभी आसमान से,
निगाहें मिला कर तो देखो
कभी पथरीली राहों पर,तो कभी नराम दूब पर
कदम मिला कर तो देखो
अश्कों की भाषा में बहुत हो गयी बातें ,
लबों को अपने अब हिला कर तो देखो
इंसान में मिले हैं ये रब तुझे,
एक बार आजमा के तो देखो
कभी संग यारों के अपने', स्थान उनका भी
एक दिल में बना कर तो देखो
अफसाने कई बताएं तुमने हमें,
एक बार ये उन्हें भी बता कर तो देखो
तरसती हैं उनकी निगाहें जिस प्यार के लिए,
एक बार उन्हें वो जाता कर तो देखो
इंसान में ...........................
तुझसे जुड़े हर जर्रे को दिया है
उन्होंने शाश्वत प्रेम,
तुम क्षणभंगुर ही सही,
जरा कदम बढ़ा कर तो देखो
शिकायत है तुम्हें की ,वक्त नहीं मिलता पास ,
उलझनें हैं बढती,नहीं दिखती सुकून की एक आस
मानस की पाने को तरलता ,
जरा उनका अनुभव आजमा कर तो देखो
इंसान में ........................................
हमारे भगवान् ,मेरा मतलब माता और पिता को समर्पित !!
कभी क्षैतिज धरातल,तो कभी आसमान से,
निगाहें मिला कर तो देखो
कभी पथरीली राहों पर,तो कभी नराम दूब पर
कदम मिला कर तो देखो
अश्कों की भाषा में बहुत हो गयी बातें ,
लबों को अपने अब हिला कर तो देखो
इंसान में मिले हैं ये रब तुझे,
एक बार आजमा के तो देखो
कभी संग यारों के अपने', स्थान उनका भी
एक दिल में बना कर तो देखो
अफसाने कई बताएं तुमने हमें,
एक बार ये उन्हें भी बता कर तो देखो
तरसती हैं उनकी निगाहें जिस प्यार के लिए,
एक बार उन्हें वो जाता कर तो देखो
इंसान में ...........................
तुझसे जुड़े हर जर्रे को दिया है
उन्होंने शाश्वत प्रेम,
तुम क्षणभंगुर ही सही,
जरा कदम बढ़ा कर तो देखो
शिकायत है तुम्हें की ,वक्त नहीं मिलता पास ,
उलझनें हैं बढती,नहीं दिखती सुकून की एक आस
मानस की पाने को तरलता ,
जरा उनका अनुभव आजमा कर तो देखो
इंसान में ........................................
हमारे भगवान् ,मेरा मतलब माता और पिता को समर्पित !!
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