कुछ अरमान सजाये थे ख्वाबो में हमने ,
दिल में उन अधूरी तमन्नाओ की कसक आज भी है
हर पल थम सी जाती है ये नब्ज ,
हर जहर से बढ़ कर उन यादों का असर आज भी है,
यूँ तो हमने ओढा था उस दिन खुद ही कफ़न अपना,
जिंदगी की नकाब में मरती ये रूह,
तुझे सोच के जिन्दा आज भी है,
बेमकसद सी हो गयी है ये जिंदगी हमारी,
तेरी पनाहों की तलाश में जारी जिंदगी का सफ़र आज भी है
2 टिप्पणियां:
सुन्दर नज़्म.. गलतियां भी नही हैं..बधाई
thanq sir
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